तोतले का भी बड़ा महत्व होता है जब हम जब हम छोटे छोटे दोस्त पढ़ाई के शुरुआती दिनों में पढ़ने जाते थे तो कोई कोई लड़का थोड़ा चलाकर बोलता था और वह के को तेरे कोले कोले कोले बोलता था तो बड़ा मजा आता था उसकी बोली मेघा को हिंदी वर्णमाला रहे थे बोल बेटा कैसे कबूतर कबूतर मजा आ गया यार हंसते हंसते पेट दर्द करने लग जाता अध्यापक जी को गुस्सा आया और बोले जैसे मैं बोलता हूं वैसे ही बोल तुझे टो फिर दूंगा राजा पपजी बोले कैसे कबूतर मैं थोड़ा संभल कर बैठे पपजी का कहां मानते थे गुरु जी ने कहा वैसा ही भाषा में बोल देते थे अब गुरुजी भी परेशान और कहा कि मुझे आज भी याद आती है तो मैं अकेले में भी हंसता हूं हे भगवान 

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