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June, 2019 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
😁😁😁😁😁😁😁😁

MBBS के विद्यार्थी *आपरेशन*
सीखने के लिए
टेबल के पास जमा थे और टेबल पर एक मरा हुआ कुत्ता पड़ा था।

उनके प्रोफेसर ने कुत्ते की नाक में अपनी उंगली डाली और बाहर निकालकर चाटने लगा।

इसके बाद उसने सभी छात्रों को वैसा ही करने को कहा।

तो सभी ने एक के बाद एक कुत्ते की नाक में अपनी उंगली डाली और बाहर निकालकर चाटा।

अंत मे प्रोफेसर उनकी तरफ देखकर बोला :
" सर्वाधिक महत्वपूर्ण बात होती है - ध्यान।

 मैंने कुत्ते की नाक में अपनी *तीसरी उंगली* डाली और चाटते समय *दूसरी उंगली* को चाटा।

 मैं उम्मीद करता हूँ कि, अगली बार तुम लोग अपना पूरा *ध्यान* लगाओगे। "

💐 *Wish you Happy Dhyaan Divas* 💐

(छात्रों ने प्रोफेसर को उठा उठा के पटका और पटक पटक के मारा )
😄😂😊😂😊  😄😂😊😄😂😊
जीवन हे अनमोल

ये तस्वीर चायनीज़ हेनन हॉस्पिटल में ली गई है

 जिसमें एक कैंसर की मरीज नोटों से भरा बैग लेकर डॉक्टर के पास आई और

 उसने डॉक्टर से कहा- मेरी जिंदगी बचाएँ।

 मेरे पास और भी बहुत दौलत है

 तुम्हें देने के लिए लेकिन जब डॉक्टर ने बताया-

 अब उसका इलाज मुमकिन नहीं है

 क्योंकि उसका कैंसर लास्ट स्टेज पर है

 और अब डाक्टर्स उसकी जिंदगी नहीं बचा सकते।


तो वह बहुत गुस्सा हुई और पागलों की तरह चीखते हुए

 पूरे हॉस्पिटल के बरामदे में नोटों को फेंकती

 गई और बोलती रही-

 "क्या फ़ायदा इस दौलत का जो मेरी जान नहीं बचा सकती।

" क्या फ़ायदा इतना अमीर होने का,

 ये दौलत मुझे सेहत नहीं दे सकती।

 ये दौलत जिंदगी नहीं दे सकती। 😢

इसलिए दोस्तों भाग-दौड़ वाली इस ज़िन्दगी में सिर्फ पैसे

कमाने में व्यस्त ना रहे,

 सेहत पर भी ध्यान दे।.

...जीवन हे अनमोल हे मानव ना पैसो से तोल....सतनाम

सदगुरू...सरीर खयाल रको मितरो

शिवराज कि कलम से

*मृत्यु*

*जब कोई इंसान इस दुनिया से* *विदा हो जाता है तो उसके कपड़े, उसका बिस्तर,* *उसके द्वारा इस्तेमाल किया* *हुआ सभी सामान उसी के साथ तुरन्त घर से निकाल दिये जाते है।*
*पर कभी कोई उसके द्वारा कमाया गया धन-दौलत. प्रोपर्टी, उसका घर, उसका पैसा, उसके जवाहरात आदि, इन सबको क्यों नही छोड़ते?*
*बल्कि उन चीजों को तो ढूंढते है, मरे हुए के हाथ, पैर, गले से* *खोज-खोजकर, खींच-खींचकर निकालकर चुपके से जेब मे डाल लेते है,* *वसीयत की तो मरने वाले से ज्यादा चिंता करते है।*
*इससे पता चलता है कि आखिर रिश्ता किन चीजों से था।*

*इसलिए पुण्य परोपकार ओर नाम की कमाई करो। इसे कोई ले नही सकता, चुरा नही सकता। ये कमाई तो ऐसी है, जो जाने वाले के साथ ही जाती है।*

*हाड़ जले ज्यूँ लाकड़ी, केस जले ज्यूँ घास।*
*कंचन जैसी काया जल गई, कोई न आयो पास*

( एक मित्र से प्राप्त )

जय हो🙏
(कर्ज)

"कहाँ जा रही है ,बहू ?"..स्कूटर की चाबी उठाती हुई पृथा से सास ने पूछा.
"मम्मी की तरफ जा रही थी अम्माजी"
"अभी परसों ही तो गई थी"
"हाँ पर आज पापा की तबियत ठीक नही है, उन्हें डॉ को दिखाने ले जाना है"
"ऊहं!" "ये तो रोज का हो गया है" ,"एक फोन आया और ये चल दी", "बहाना चाहिए पीहर जाने का "सास ने जाते जाते पृथा को  सुनाते हुए कहा.."हम तो पछता गए भई "  "बिना भाई की बहन से शादी करके"  "सोचा था ,चलो बिना भाई की बहन है ,तो क्या हुआ कोई तो इसे भी ब्याहेगा"

"अरे !" "जब लड़की के बिना काम ही नही चल रहा,तो ब्याह ही क्यूं किया"..ये सुनकर पृथा के तन बदन में आग लग गई ,दरवाज़े से ही लौट  आई  ओर बोली ,"ये सब तो आप लोगो को पहले ही से पता था ना आम्मा जी ,कि मेरे भाई  नही है"  "और माफ करना"  "इसमें  एहसान की क्या बात हुई ,आपको भी तो पढ़ी लिखी कमाऊ बहु मिली है।"

"लो !" "अब तो ये अपनी नोकरी औऱ पैसों की भी धौंस दिखाने लगी।"
"…
।। मांस मत खाओ ।।

अंकुरज भखे सो मानवा, रज बीज भखे सो स्वान ।
जीव हते सो काल है सदा नरक परमान ।।
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अब वेद शास्त्रों से सुनिये वे भी संवेद के समानही मांस मदिरा आदि अभक्ष्यका ग्रहण तथा किसीके दुःख देनेको महापाप बतलाते है ।
अथर्व---"अस्तिनु तस्माद् ओ जीयो यद् विहव्ये न
ईजिरे ।" जीवहत्याके कर्म गंदे हैं उनका उत्तम फल नही,वोही भगवान् की उपासना सर्वश्रेष्ठ है जिसमें जीवहत्या नहीं होती । ""मग्धादेवा उत शुना यजन्त उत गो रँगे:पुरुधा यजन्त"" वे एक तरहके पागल है जो कुत्ते जैसे निकृष्ट प्राणियोंतकके मांसको भी नही छोड़ते तथा गऊओके अंगको काट काटकर खाने खिलानेसे
परमात्माको प्रसन्न हुआ मानते है । वो मार्ग उनके कल्याण का नहीं है , किंतु नरक देनेवाला है । कोई -कोई यह कहते हैं कि, यज्ञ आदिमें की गई हिंसा हत्या नहीं है , बाकी सब हत्याएं है ।यदि विचार करके देखा जाय तो इसमें भी सार नहीं है - क्योंकि, अथर्व वेदमें लिखा हुआ है कि, """इष्टापूर्तस्य व्यभजन्त यमस्य अभी षोडशं सभापद:”"
यदि यज्ञ आदिमें भी हत्या करोगे तो तुम्हें पु…
शिव महापुराण के अनुसार अनादि अनन्त परमेश्वर शिवजी ने एक बार एक से अनेक होना चाहा, तब उन्होंने अपनी दाहिनी भुजा से बांहिनी भुजा का मंथन किया तो जगदम्बा स्वरूप का प्राकट्य हुआ तथा बांहिनी भुजा से दाहिनी भुजा का मंथन किया तो भगवान नारायण का प्राकट्य हुआ।
उसके पश्चात सृष्टि के निर्माण की प्रक्रिया के लिए योगनिद्रा में लीन भगवान नारायण की नाभि में से कमल निकला जिससे भगवान ब्रह्मा जी का प्राकट्य हुआ, और ब्रह्मा जी ने सृष्टि का निर्माण किया।
विष्णु जी सृष्टि के पालनकर्ता हैं तथा शिव जी संहारकर्ता हैं।
अंततः ब्रह्माजी, विष्णुजी व महेशजी तीनों ही त्रिदेव एक ही स्वरूप हैं एक दूसरे से भिन्न नहीं हैं।
वाह क्या मन घडन कहानी बनाके वीडियो मे बताई,


मनुष्य को अपनी ऐब (आस्था )

मे कुछ दिखता ही नहीं चाहे कुछ भी कहो मान जाते है,


ऐसा बोले की एक पांडे ने भैंस को जन्म दिया था

सतयुग मे तो तुरंत मान जाएंगे,

इस दुनिया को परम पिता परमेश्वर जी ने बनाया,

जिसका भेद किसी को भी नहीं है,

 और मालिक ने जो एक बार सिस्टम कायम कर दिया वो

वापिस मिटता नहीं है


जैसे बीज से पेड़ बनता है

और फल से वापिस बीज


इसी तरह इंसान का जन्म भी माँ की कोक से ही  होता है


न तो आसमान,

 न जमीन से,

और नहीं किसी और से,

धरती पर उत्पत्ति अण्डे से

,जेरज से,पसीने से,वनस्पति अँकुर से होती है

 अन्य कोई रास्ता नहीं है।

तो किसी भी मनुष्य या देवता या संत

,महापुरूषों  का जन्म अगर इस ब्रह्मांड में हुआ है

 तो वो माँ के गर्भ से ही हुआ है

 अन्यथा ओर कोई भी रास्ता नहीं है

।ओर रही बात ईश्वर की तो वो एक निराकार शक्ति है

 ओर पूरे ब्रह्मांड में एक रूप निरंतर मोजूद है

 ।वही शक्ति पैदा करती है ,

पालन करती है ओर नष्ट करती है ।

इस ब्रह्माण्ड में एक ही ईश्वर है वही अल्लाह है

,राम है,शिव है,गुरू है ,god है

।वह पानी में ,आकसिजन में ,मिट्टी में ,हवा में ,

आग में ,आकाश में ओर पाताल में,

पशु पक्षियों मे ,

वनस्पति में,सूर्य मे ,तारो मे ,

 व सम्पूर्ण ब्रह्मांड के कण कण में एक रूप निरंतर गमन कर रही है।


2⃣3⃣❗0⃣6⃣❗2⃣0⃣1⃣9⃣
*दुनियां क्या2⃣3⃣❗0⃣6⃣❗2⃣0⃣1⃣9⃣

🤔🤔🤔🤔🤔🤔
       *एक साधू किसी नदी के पनघट पर गया ।

 और पानी पीकर पत्थर पर सिर रखकर सो गया

,पनघट पर पनिहारिन आती-जाती रहती हैं

तो तीन-चार पनिहारिनें पानी के लिए आईं

तो एक पनिहारिन ने कहा“

आहा! साधु हो गया

,फिर भी तकिए का मोह नहीं गया

पत्थरों का ही सही,लेकिन रखा तो है।

       *पनिहारिन की बात साधु ने सुन ली…

उसने तुरंत पत्थर फेंक दिया…

दूसरी बोली,”

साधु हुआ, लेकिन खीज नहीं गई..

अभी रोष नहीं गया,तकिया फेंक दिया।

”तब साधु सोचने लगा,अब वह क्या करें ?

तब तीसरी पनिहारिन बोली,

”बाबा!यह तो पनघट है,*

          *यहां तो हमारी जैसी पनिहारिनें आती ही रहेंगी,

बोलती ही रहेंगी,

उनके कहने पर तुम बार-बार परिवर्तन करोगे तो साधना कब करोगे?

”लेकिन एक चौथी पनिहारिन ने बहुत ही सुन्दर और एक बड़ी अद्भुत बात कह दी

“साधु,क्षमा करना, लेकिन हमको लगता है,

 तूमने सब कुछ छोड़ा लेकिन अपना चित्त नहीं छोड़ा है

,अभी तक वहीं का वहीं बने हुए है

।दुनिया पाखण्डी कहे तो कहे,

 तूम जैसे भी हो,हरिनाम लेते रहो।

”सच तो यही है, दुनिया का तो काम ही है कहना*

       *आप ऊपर देखक…
पापा की पुण्य तिथि पर हम सभी को देश धर्म जाति से परे हटकर एक इंसानियत के नाते किसी की जिंदगी बचाने का मौका मिलने जा रहा है। क्योंकि रक्तदान दुनिया का सबसे बड़ा दान है। ये दान करके आप महान पूण्य कार्य के भागीदार होंगे।क्योंकि दुनिया मे हर चीज मिल सकती है लेकिन ब्लड तो सिर्फ इंसान ही दे सकता है। क्योंकि ब्लड की न तो खेती होती है, न ब्लड किसी भी फेक्टरी में बनता है न इसका कोई पेड़ पौधा होता है जिससे ब्लड मिल सके। ब्लड के लिए इंसान ही इसे दुसरो को देकर उसकी जान बचा सकता है।क्योंकि हमारे परिवार में, समाज मे या किसी भी आस पास पड़ोसी के किसी मरीज को रक्त की जरूरत हो और बिना रक्त के उसकी जान चली जाए तो आप ही सोचिये उस परिवार पर क्या बीतती होगी। पैसे से ब्लड मिल जाता है ये बात सच है लेकिन जब कोई ब्लड डोनेट ही नही करेगा तो उस समय आपका पैसा भी कोई काम नही करेगा।*

*कल आप सभी रक्तदान ही नही करेंगे बल्कि किसी एक इंसान की जिंदगी भी बचाकर आएंगे क्योंकि आपका दिया हुआ रक्त किसी न किसी मरीज के रगों में दौड़ेगा तब वो मरीज ओर उसका परिवार बारम्बार आपको नमन करेगा बारम्बार आपको आशीर्वाद देगा कि आपके ब्लड की वजह…
जैसे ही ट्रेन रवाना होने को हुई,
एक औरत और उसका पति एक ट्रंक लिए डिब्बे में घुस पडे़।
दरवाजे के पास ही औरत तो बैठ गई पर आदमी चिंतातुर खड़ा था।
जानता था कि उसके पास जनरल टिकट है और ये रिज़र्वेशन डिब्बा है।
टीसी को टिकट दिखाते उसने हाथ जोड़ दिए।
" ये जनरल टिकट है।अगले स्टेशन पर जनरल डिब्बे में चले जाना।वरना आठ सौ की रसीद बनेगी।"
कह टीसी आगे चला गया।
पति-पत्नी दोनों बेटी को पहला बेटा होने पर उसे देखने जा रहे थे।
सेठ ने बड़ी मुश्किल से दो दिन की छुट्टी और सात सौ रुपये एडवांस दिए थे।
 बीबी व लोहे की पेटी के साथ जनरल बोगी में बहुत कोशिश की पर घुस नहीं पाए थे।
 लाचार हो स्लिपर क्लास में आ गए थे।
" साब, बीबी और सामान के साथ जनरल डिब्बे में चढ़ नहीं सकते।हम यहीं कोने में खड़े रहेंगे।बड़ी मेहरबानी होगी।"
टीसी की ओर सौ का नोट बढ़ाते हुए कहा।
" सौ में कुछ नहीं होता।आठ सौ निकालो वरना उतर जाओ।"
" आठ सौ तो गुड्डो की डिलिवरी में भी नहीं लगे साब।नाती को देखने जा रहे हैं।गरीब लोग हैं, जाने दो न साब।" अबकि बार पत्नी ने कहा।
" तो फिर ऐसा करो, चार सौ निकालो।एक…
सुबह सुबह मिया बीवी के झगड़ा हो गया,

बीवी गुस्से मे बोली - बस, बहुत कर लिया बरदाश्त, अब एक मिनट भी तुम्हारे साथ नही रह सकती।

पति भी गुस्से मे था, बोला "मैं भी तुम्हे झेलते झेलते तंग आ चुका हुं।

पति गुस्से मे ही दफ्तर चले गया पत्नी ने अपनी मां को फ़ोन किया और बताया के वो सब छोड़ छाड़ कर बच्चो समेत मायके आ रही है, अब और ज़्यादा नही रह सकती इस जहन्नुम मे।

मां ने कहा - बेटी बहु बन के आराम से वही बैठ, तेरी बड़ी बहन भी अपने पति से लड़कर आई थी, और इसी ज़िद्द मे तलाक लेकर बैठी हुई है, अब तुने वही ड्रामा शुरू कर दिया है, ख़बरदार जो तुने इधर कदम भी रखा तो... सुलह कर ले पति से, वो इतना बुरा भी नही है।

मां ने लाल झंडी दिखाई तो बेटी के होश ठिकाने आ गए और वो फूट फूट कर रो दी, जब रोकर थकी तो दिल हल्का हो चुका था,
पति के साथ लड़ाई का सीन सोचा तो अपनी खुद की भी काफ़ी गलतियां नज़र आई।

मुहं हाथ धोकर फ्रेश हुई और पति के पसंद की डीश बनाना शुरू कर दी, और साथ स्पेशल खीर भी बना ली, सोचा कि शाम को पति से माफ़ी मांग लुंगी, अपना घर फिर भी अपना ही होता है पति शाम को जब घर आया तो पत्नी ने उसका अच्छे से स्वा…
बाहर बारिश हो रही थी और अन्दर क्लास चल रही थी, तभी टीचर ने बच्चों से पूछा कि अगर तुम सभी को 100-100 रुपये दिए जाए तो तुम सब क्या क्या खरीदोगे ?.किसी ने कहा कि मैं वीडियो गेम खरीदुंगा, किसी ने कहा मैं क्रिकेट का बेट खरीदुंगा, किसी ने कहा कि मैं अपने लिए प्यारी सी गुड़िया खरीदुंगी,.तो किसी ने कहा मैं बहुत सी चॉकलेट्स खरीदुंगी | एक बच्चा कुछ सोचने में डुबा हुआ था, टीचर ने उससे पुछा कि तुम क्या सोच रहे हो ? तुम क्या खरीदोगे ?.बच्चा बोला कि टीचर जी, मेरी माँ को थोड़ा कम दिखाई देता है तो मैं अपनी माँ के लिए एक चश्मा खरीदूंगा ‌।.. टीचर ने पूछाः तुम्हारी माँ के लिए चश्मा तो तुम्हारे पापा भी खरीद सकते है, तुम्हें अपने लिए कुछ नहीं खरीदना ? बच्चे ने जो जवाब दिया उससे टीचर का भी गला भर आया | बच्चे ने कहा कि मेरे पापा अब इस दुनिया में नहीं है | मेरी माँ लोगों के कपड़े सिलकर मुझे पढ़ाती है और कम दिखाई देने की वजह से वो ठीक से कपड़े नहीं सिल पाती है इसीलिए मैं मेरी माँ को चश्मा देना चाहता हुँ ताकि मैं अच्छे से पढ़ सकूँ, बड़ा आदमी बन सकूँ और माँ को सारे सुख दे सकूँ !टीचर:-बेटा तेरी सोच ही तेरी कमाई…
सत्य कथा :- एक लड़का मुम्बई से रेलवे का परीक्षा देकर, अपने सीट पर जैसे ही बैठा। एक लड़की हाँफते हुए आयी। लड़के से बोली, की मुझे बचा लो, प्लीज! लड़का कुछ समझता कि वह लड़की कम्बल लेकर लड़के के पैर के ऊपर अपना सर रखकर सो गयी। काफी दूर जब ट्रेन निकल गयी। तो उस लड़की ने लड़के से पूछी की यह ट्रेन कहाँ तक जायेगी। लड़के ने कहा कि लखनऊ! तब तक टीसी आया। बोला कि टिकट दिखाइये। लड़की ने कहा कि आप लखनऊ तक का टिकट बना दीजिये। लड़का लखनऊ तक आते आते उस लड़की से घुलमिल गया था। ट्रेन जब लखनऊ स्टेशन पर रुकी। तो उस लड़के से बोली कि, मैं इस शहर में नई हूँ। मेरे एक रिश्तेदार रहते हैं। लेकिन बैग में पता रखते समय भूल गयी। आप दो चार दिन अपने घर मुझे रख लीजिये। लड़के ने कहा कि ठीक हैं। जब लड़का अपने घर पहुँचा, घर की बेल बजायी। तो लड़के की बहन देख कर हैरान रह गयी। कि भैया परीक्षा देने गया था। तो रिजेल्ट भी साथ लाया हैं। लड़के ने लड़की की मजबूरी बतायी। घर वाले राजी हो गए। लड़की दूसरे दिन घर मे इतना राशन खरीद कर रख दी। कि घर वाले भूल ही गये कि, इस लड़की को इसके रिश्तेदार के यहाँ छोड़ना हैं। लड़के के बहन की शादी तो तय हो गयी। लेकिन 80 …
एक बार जरुर पढ़े प्लीज..........

एक गरीब लड़का एक अमीर आदमी की बेटी से प्यार करता था. एक दिन उसने हिम्मत करके अपने दिल की बात उस लड़की को बता दी. उस लड़की को अपने पिता के पैसों पर बड़ा घमंड था. वह बोली, “देखो! मेरा रोज़ का खर्च तुम्हारी एक महीने की सैलरी से भी ज्यादा है. मैं तुमसे कैसे प्यार कर सकती हूँ? तुमने ऐसा सोच कैसे लिया? मैं तुम्हें कभी प्यार नहीं करूंगी. इसलिए बेहतर होगा कि तुम मुझे भूल जाओ और अपने लेवल की किसी लड़की से शादी कर लो.”

वह लड़का उस लड़की को भुला नहीं पाया. १० साल गुज़र गए. एक दिन अचानक वह उसी लड़की से एक शॉपिंग मॉल में टकरा गया. लड़की उसे देखते ही पहचान गई और उसे १० साल पहले की घटना याद आ गई. उस पर अब भी पैसे का गुरुर सवार था. फिर से उस लड़के को नीचा दिखने के लिए वह बोली, “हे तुम! कैसे हो? मैंने शादी कर ली है और तुम्हें पता है मेरे पति की सैलरी कितनी हैं? ५ लाख रुपये प्रति माह. क्या तुम कभी इतना कमा सकते हो?”

इतने सालों बाद भी उस लड़की के वैसे ही व्यंग्यपूर्ण शब्द सुनकर उस लड़के की आँखें आँसुओं से भीग गई.

कुछ ही पलों में उस लड़की का पति वहाँ आ गया. इससे पहले कि वह कुछ कह पाती,…
जरूर पढें - जीवन के लिए खर्च
- पत्नी ने कहा - आज धोने के लिए ज्यादा कपड़े मत निकालना…
पति- क्यों??
उसने कहा..- अपनी काम वाली बाई दो दिन नहीं आएगी…
पति- क्यों??
पत्नी- गणपति के लिए अपने नाती से मिलने बेटी के यहाँ जा रही है, बोली थी…
पति- ठीक है, अधिक कपड़े नहीं निकालता…
पत्नी- और हाँ!!! गणपति के लिए पाँच सौ रूपए दे दूँ उसे? त्यौहार का बोनस..
पति- क्यों? अभी दिवाली आ ही रही है, तब दे देंगे…
पत्नी- अरे नहीं बाबा!! गरीब है बेचारी, बेटी-नाती के यहाँ जा रही है, तो उसे भी अच्छा लगेगा… और इस महँगाई के दौर में उसकी पगार से त्यौहार कैसे मनाएगी बेचारी!!
पति- तुम भी ना… जरूरत से ज्यादा ही भावुक हो जाती हो…
पत्नी- अरे नहीं… चिंता मत करो… मैं आज का पिज्जा खाने का कार्यक्रम रद्द कर देती हूँ… खामख्वाहपाँच सौ रूपए उड़ जाएँगे, बासी पाव के उन आठ टुकड़ों के पीछे…
पति- वा, वा… क्या कहने!! हमारे मुँह से पिज्जा छीनकर बाई की थाली में??
तीन दिन बाद… पोंछा लगाती हुई कामवाली बाई से पति ने पूछा...
पति- क्या बाई?, कैसी रही छुट्टी?
बाई- बहुत बढ़िया हुई साहब… दीदी ने पाँच सौ रूपए दिए थे ना.. त्यौहार का बोनस..
पति- तो ज…
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मान लीजिये आप सुनार के पास गए आपने 10 ग्राम प्योर सोना 30000 रुपये का खरीदा। उसका लेकर आप सुनार के पास हार बनबाने गए। सुनार ने आपसे 10 ग्राम सोना लिया और कहा की 2000 रुपये बनबाई लगेगी। आपने कहा ठीक है। उसके बाद सुनार ने 1 ग्राम सोना निकाल लिया और 1 ग्राम का टाका लगा दिया। क्यों विना टाके के आपका हार नही बन सकता। यानी की 1 ग्राम सोना 3000 रुपये का निकाल लिया । और 2000 रुपये आपसे बनबाई अलग से लेली। यानी आपको 5000 रुपये का झटका लग गया। अब आपके 30 हजार रुपये सोने की कीमत मात्र 25 हजार रुपये बची। और सोना भी 1 ग्राम कम कम हो कर 9 ग्राम शेष बचा। बात यही खत्म नही हुई। उसके बाद अगर आप पुन: अपने सोने के हार को बेचने या कोई और आभूषण बनबाने पुन: उसी सुनार के पास जाते है तो वह पहले टाका काटने की बात करता है। और सफाई करने के नाम पर 0.5 ग्राम सोना और कम हो जाता है। अब आपके पास मात्र 8.5 ग्राम सोना बचता है। यानी की 30 हजार का सोना मात्र 25500 रुपये का बचा।
आप जानते होंगे
30000 रुपये का सोना + 2000 रुपये बनबाई = 32000 रुपये
1 ग्राम का टाका कटा 3000 रुपए + 0.5 पुन: बेचने या तुड़वाने पर कटा = सफाई …