*मृत्यु*

*मृत्यु*


*जब कोई इंसान इस दुनिया से* *विदा हो जाता है तो उसके कपड़े, उसका बिस्तर,* *उसके द्वारा इस्तेमाल किया* *हुआ सभी सामान उसी के साथ तुरन्त घर से निकाल दिये जाते है।*
*पर कभी कोई उसके द्वारा कमाया गया धन-दौलत. प्रोपर्टी, उसका घर, उसका पैसा, उसके जवाहरात आदि, इन सबको क्यों नही छोड़ते?*
*बल्कि उन चीजों को तो ढूंढते है, मरे हुए के हाथ, पैर, गले से* *खोज-खोजकर, खींच-खींचकर निकालकर चुपके से जेब मे डाल लेते है,* *वसीयत की तो मरने वाले से ज्यादा चिंता करते है।*
*इससे पता चलता है कि आखिर रिश्ता किन चीजों से था।*

*इसलिए पुण्य परोपकार ओर नाम की कमाई करो। इसे कोई ले नही सकता, चुरा नही सकता। ये कमाई तो ऐसी है, जो जाने वाले के साथ ही जाती है।*

*हाड़ जले ज्यूँ लाकड़ी, केस जले ज्यूँ घास।*
*कंचन जैसी काया जल गई, कोई न आयो पास*

( एक मित्र से प्राप्त )

जय हो🙏

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