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चौदह प्राचीन हिन्दू परम्पराएं और उनसे जुड़े लाभ
चौदह प्राचीन हिन्दू परम्पराएं और उनसे जुड़े फायदे पुराने समय से बहुत सी परंपराएं प्रचलित हैं जिनका पालन आज भी काफी लोग कर रहे हैं ये परंपराएं धर्म से जुड़ी दिखाई देती हैं लेकिन इनके वैज्ञानिक कारण भी हैं जो लोग इन परंपराओं को अपने जीवन में उतारते हैं वे स्वास्थ्य संबंधी कई परेशानियों से बचे रहते हैं यहां जानिए ऐसी ही चौदह प्रमुख परंपराएं जिनका पालन अधिकतर परिवारों में किया जाता है 1एक ही गोत्र में शादी नहीं करना कई शोधों में ये बात सामने आई है कि व्यक्ति को जेनेटिक बीमारी न हो इसके लिए एक इलाज है सेपरेशन ऑफ़ जींस यानी अपने नजदीकी रिश्तेदारो में विवाह नहीं करना चाहिए रिश्तेदारों में जींस सेपरेट विभाजन नहीं हो पाते हैं और जींस से संबंधित बीमारियां जैसे कलर ब्लाईंडनेस आदि होने की संभावनाएं रहती हैं संभवत पुराने समय में ही जींस और डीएनए के बारे खोज कर ली गई थी और इसी कारण एक गोत्र में विवाह न करने की परंपरा बनाई गई 2कान छिदवाने की परंपरा स्त्री और पुरुषों दोनों के लिए पुराने समय से ही कान छिदवाने की परंपरा चली आ रही है हालांकि आज पुरुष वर्ग में ये परंपरा मानने वालों की संख्या काफी कम हो गई है इस परंपरा की वैज्ञानिक मानयता ये है कि इससे सोचने की शक्ति बढ़ती है बोली अच्छी होती है कानों से होकर दिमाग तक जाने वाली नस का रक्त संचार नियंत्रित और व्यवस्थित रहता है कान छिदवाने से एक्यूपंक्चर से होने वाले स्वास्थ्य लाभ भी मिलते हैं ऐसी मान्यता है कि इससे छोटे बच्चों को नजर भी नहीं लगती है 3माथे पर तिलक लगाना स्त्री और पुरुष माथे पर कुमकुम चंदन का तिलक लगाते हैं इस परंपरा का वैज्ञानिक तर्क यह है कि दोनों आंखों के बीच में आज्ञा चक्र होता है इसी चक्र स्थान पर तिलक लगाया जाता है इस चक्र पर तिलक लगाने से हमारी एकाग्रता बढ़ती है मन बेकार की बातों में उलझता नहीं है तिलक लगाते समय उंगली या अंगूठे का जो दबाव बनता है, उससे माथे तक जाने वाली नसों का रक्त संचार व्यवस्थित होता है रक्त कोशिकाएं सक्रिय हो जाती हैं 4जमीन पर बैठकर भोजन करना जमीन पर बैठकर भोजन करना पाचन तंत्र और पेट के लिए बहुत फायदेमंद है पालथी मारकर बैठना एक योग आसन है इस अवस्था में बैठने से मस्तिष्क शांत रहता है और भोजन करते वक्त दिमाग शांत हो तो पाचन क्रिया अच्छी रहती है पालथी मारकर भोजन करते समय दिमाग से एक संकेत पेट तक जाता है कि पेट भोजन ग्रहण करने के लिए तैयार हो जाए इस आसन में बैठने से गैस कब्ज अपच जैसी समस्याएं दूर रहती हैं

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5हाथ जोड़कर नमस्ते करना हम जब भी किसी से मिलते हैं तो हाथ जोड़कर नमस्ते या नमस्कार करते हैं इस परंपरा का वैज्ञानिक तर्क यह है नमस्ते करते समय सभी उंगलियों के शीर्ष आपस में एक दूसरे के संपर्क में आते हैं और उन पर दबाव पड़ता है हाथों की उंगलियों की नसों का संबंध शरीर के सभी प्रमुख अंगों से होता है इस कारण उंगलियों पर दबाव पड़ता है तो इस एक्यूप्रेशर दबाव का सीधा असर हमारी आंखों कानों और दिमाग पर होता है साथ ही नमस्ते करने से सामने वाला व्यक्ति हम लंबे समय तक याद रह पाता है इस संबंध में एक अन्य तर्क यह है कि जब हम हाथ मिलाकर अभिवादन करते है तो सामने वाले व्यक्ति के कीटाणु हम तक पहुंच सकते हैं जबकि नमस्ते करने पर एक दूसरे का शारीरिक रूप से संपर्क नहीं हो पाता है और बीमारी फैलाने वाले वायरस हम तक पहुंच नहीं पाते हैं 6भोजन की शुरुआत तीखे से और अंत मीठे से धार्मिक कार्यक्रमों में भोजन की शुरुआत अक्सर मिर्च मसाले वाले व्यंजन से होती है और भोजन का अंत मिठाई से होता है इसका वैज्ञानिक तर्क यह है कि तीखा खाने से हमारे पेट के अंदर पाचन तत्व एवं अम्ल सक्रिय हो जाते हैं इससे पाचन तंत्र ठीक तरह से संचालित होता है अंत में मीठा खाने से अम्ल की तीव्रता कम हो जाती है इससे पेट में जलन नहीं होती है 7पीपल की पूजा आमतौर पर लोगों की मान्यता यह है कि पीपल की पूजा से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं इसका एक तर्क यह है कि इसकी पूजा इसलिए की जाती है ताकि हम वृक्षों की सुरक्षा और देखभाल करें और वृक्षों का सम्मान करें उन्हें काटें नहीं। पीपल एक मात्र ऐसा वृक्ष है जो रात में भी ऑक्सीजन छोड़ता है इसीलिए अन्य वृक्षों की अपेक्षा इसका महत्व काफी अधिक बताया गया है 8दक्षिण दिशा की ओर सिर करके सोना दक्षिण दिशा की ओर पैर करके सोने पर बुरे सपने आते हैं इसीलिए उत्तर दिशा की ओर पैर करके सोना चाहिए इसका वैज्ञानिक तर्क ये है कि जब हम उत्तर दिशा की ओर सिर करके सोते हैं तब हमारा शरीर पृथ्वी की चुंबकीय तरंगों की सीध में आ जाता है शरीर में मौजूद आयरन यानी लोहा दिमाग की ओर प्रवाहित होने लगता है इससे दिमाग से संबंधित कोई बीमारी होने का खतरा बढ़ जाता है ब्लड प्रेशर भी असंतुतित हो सकता है दक्षिण दिशा में सिर करके सोने से ये परेशानियां नहीं होती
9सूर्य की पूजा करना सुबह सूर्य को जल चढ़ाते हुए नमस्कार करने की परंपरा बहुत पुराने समय से चली आ रही है इस परंपरा का वैज्ञानिक तर्क ये है कि जल चढ़ाते समय पानी से आने वाली सूर्य की किरणें जब आंखों हमारी में पहुंचती हैं तो आंखों की रोशनी अच्छी होती है साथ ही सुबह-सुबह की धूप भी हमारी त्वचा के लिए फायदेमंद होती है शास्त्रों की मान्यता है कि सूर्य को जल चढ़ाने से घर परिवार और समाज में मान सम्मान मिलता है कुंडली में सूर्य के अशुभ फल खत्म होते हैं 10चोटी रखना पुराने समय में सभी ऋषि मुनी सिर पर चोटी रखते थे आज भी कई लोग रखते हैं इस संबंध में मान्यता है कि जिस जगह पर चोटी रखी जाती है उस जगह दिमाग की सारी नसों का केंद्र होता है यहां चोटी रहती है तो दिमाग स्थिर रहता है क्रोध नहीं आता है और सोचने समझने की क्षमता बढ़ती है मानसिक मजबूती मिलती है और एकाग्रता बढ़ती है 11व्रत रखना पूजा पाठ त्योहार या एकादशियों पर लोग व्रत रखते हैं आयुर्वेद के अनुसार व्रत से पाचन क्रिया अच्छी होती है और फलाहार लेने से पाचनतंत्र को आराम मिलता है शोधकर्ताओं के अनुसार व्रत करने से कैंसर का खतरा कम होता है हृदय संबंधी मधुमेह आदि रोग होने की संभावनाएं भी कम रहती हैं 12चरण स्पर्श करना किसी बड़े व्यक्ति से मिलते समय उसके चरण स्पर्श करने की परंपरा पुराने समय से चली आ रही है यही संस्कार बच्चों को भी सिखाते हैं ताकि वे भी बड़ों का आदर करें इस परंपरा के संबंध में मान्यता है कि मस्तिष्क से निकलने वाली ऊर्जा हमारे हाथों से सामने वाले पैरों तक पहुंचती है और बड़े व्यक्ति के पैरों से होते हुए उसके हाथों तक पहुंचती है आशीर्वाद देते समय व्यक्ति चरण छूने वाले के सिर पर अपना हाथ रखता है इससे हाथों से वह ऊर्जा पुन हमारे मस्तिष्क तक पहुंचती है इससे ऊर्जा का एक चक्र पूरा होता है 13मांग में सिंदूर लगाना विवाहित महिलाओं के लिए मांग में सिंदूर लगाना अनिवार्य परंपरा है इस संबंध में तर्क यह है कि सिंदूर में हल्दी चूना और मरकरी पारा तरल धातु होता है इन तीनों का मिश्रण शरीर के ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करता है इससे मानसिक तनाव भी कम होता है 14तुलसी की पूजा तुलसी की पूजा करने से घर में सुख समृद्धि बनी रहती है शांति रहती है इसका तर्क यह है कि तुलसी के संपर्क से हमारा इम्यून सिस्टम मजबूत होता है यदि घर में तुलसी होगी तो इसकी पत्तियों का इस्तेमाल भी होगा और उससे कई बीमारियां दूर रहती हैं

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